इंदौर नगर निगम (IMC) में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। नगर निगम की एमआईसी (Mayor-in-Council) के सदस्य मनीष शर्मा, जिन्हें ‘मनीष मामा’ के नाम से जाना जाता है, उन्होंने विभाग की एक महिला कर्मचारी को हितग्राही से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। यह घटना निगम प्रशासन के भीतर काम के बदले अवैध वसूली की शिकायतों की पुष्टि करती है।

केवाईसी और आईडी रिकवरी के नाम पर वसूली

जानकारी के अनुसार, नगर निगम मुख्यालय में कार्यरत कर्मचारी पिंकी ने एक हितग्राही आकांक्षा पाल से उनके काम के बदले रुपयों की मांग की थी। आकांक्षा पाल अपनी आईडी रिकवर करवाने और केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए निगम कार्यालय पहुंची थीं। आरोप है कि कर्मचारी पिंकी ने इस प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करने के बदले हितग्राही से 400 रुपये की मांग की थी।

एमआईसी सदस्य ने रंगे हाथों पकड़ा

जब इस पूरे मामले की जानकारी एमआईसी सदस्य मनीष मामा को मिली, तो उन्होंने तुरंत मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कर्मचारी को हितग्राही से पैसे स्वीकार करते हुए मौके पर ही धर दबोचा। इस औचक कार्रवाई के बाद निगम मुख्यालय में हड़कंप मच गया। मनीष मामा ने तत्काल इस घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी ताकि आरोपी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

प्रशासनिक शुचिता पर सवाल

इंदौर नगर निगम अपनी कार्यप्रणाली और स्वच्छता के लिए देशभर में विख्यात है, लेकिन मुख्यालय के भीतर इस तरह की छोटी राशि के लिए रिश्वतखोरी ने प्रशासनिक शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एमआईसी सदस्य की इस सक्रियता को निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जांच के बाद उचित दंड दिया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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